Sunday, October 18, 2015

आधुनिकता

आजकल आधुनिकता के नाम पर अपने संस्कार भी भुलाने हम तैयार हो चुके हैं लेकिन ये चार दिनों की चांदनी  जाने के बाद शायद हमें कुछ कहने का भी हक़ नहीं मिलेगा क्योंकि सोच तो हम ही बदलने आतुर हैं। पुराने ख्यालों से खुद को अलग करने की यह आतुरता हमें शायद ही रास आये।  मन में गहरे तक अपने संस्कारों से जूझना साधारण बात नहीं होती लेकिन हम पीछे हटना नहीं चाहते और आगे जाने से डरते भी हैं। स्त्रियों ने स्वतंत्रता के नाम पर कम से कम कपड़ों में गुजारा करने का फैसला लिए काफी समय हो गया लेकिन आज तक पुरुषों ने हमारा अनुकरण नहीं किया।  हमारे कपड़ों के चुनाव से हम बिना कहे बहुत कुछ कहते हैं।

विचारों से हम आज भी आधुनिक नहीं बन सके हैं।  विदेशों में जिस आसानी से जीवन साथी चुने या रद्द किये जाते हैं क्या उतनी सहजता से हम अपने परिवार की स्त्रियों को स्वतन्त्रता देंगे ? हरगिज नहीं।  हाथी के दांत खाने के और दिखाने के और होते हैं वैसे ही हम अपनी सुविधा के हिसाब से मुखौटे पहनने जैसे विचार बदलते हैं।  यदि हमारी बहने सरे आम देर रात घर आएं तो हम कतई अनुमति नहीं देते और वहीँ किसी घर की बहन अपने साथ देर रात गए रहने पर आधुनिकता का चोगा निःसंकोच पहनते हैं। क्यों ये दोहरी विचारधारा जो स्वार्थ के अनुसार बदलते हैं ?

आजकल लड़कियां सरेआम लड़कों के साथ घूमने फिरने में और तस्वीरों के आदान प्रदान तक सहजता से रिश्ते निभा रहीं हैं। अस्पतालों में लडकियां पेट दर्द की शिकायत लेकर मां के साथ आतीं हैं लेकिन खुद के मां बनने की थोड़ी सी आशंका उनके मन में नहीं होती और यदि जान भी जायें तो गिड़गिड़ाने पर उत्तर आतीं हैं शादी के लिए , यही तो एक वजह है लड़कियों के मन में पुराने संस्कारों की जगह आज तक आधुनिकता ने नहीं ली। मां बनने की हद तक जाने से न डरने वाले क्यों फिर सामाजिकता के नाम पर भागते हैं ?  हम पूरी तरह से आधुनिक नहीं बन सकते , फिर क्यों ये देखा देखी का ढोंग ? हमारे बच्चों को हम जो दे सकते हैं उसमे बहुत बड़ी धरोहर है हमारे उच्च संस्कारों की। हम जहां भी जाएं हमारे संस्कार हमें इज्जत और प्रेम के हकदार बनाते हैं। विदेशों में अब सारी आधुनिकता से तंग आकर भारतीय संस्कारों का अनुकरण करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है।

हम शादी में जितना दहेज़ बेशर्मी से मांगते हैं उतनी ही बेरहमी से बहुओं को परेशान भी करते हैं जो कि आधुनिकता के नाम पर कलंक है। आधुनिक सिर्फ कपड़ों और खाने में नहीं  हुआ जा सकता बल्कि विचारों से आधुनिक होना चाहिए।  हमारे देश में उनके जमाने से आगे विनोबा भावे , राजाराम मोहन राय , रविंद्रनाथ टैगोर , भारती  जैसे महान विचारों वाले लोग आज तक हमें प्रभावित करते आ रहे हैं।  आवश्यक है एक बदलाव जिसे हमने व्यवहार में लाना है। 

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